वसंत ध्वनि - Worksheets
CBSE Worksheet 01
ध्वनि
ध्वनि
- वसंत के आगमन से प्रकृति में क्या परिवर्तन आ जाते है? ध्वनि पाठ के आधार पर बताए।
- मेरे वन में मृदुल वसंत कहकर कवि ने किस ओर संकेत किया है? ध्वनि पाठ के आधार पर बताए।
- ध्वनि कविता के कवि का नाम लिखिए। (ध्वनि)
- ध्वनि कविता के अनुसार 'नवजीवन का अमृत' से क्या अर्थ है?
- ‘ध्वनि’ शीर्षक कविता में किस आधार पर कवि अपने जीवन का अंत मानने को तैयार नहीं है?
- ‘ध्वनि’ का शाब्दिक अर्थ बताते हुए लिखिए कि कवि ने इस कविता का शीर्षक ‘ध्वनि’ क्यों रखा होगा?
- क्या कविता का शीर्षक ध्वनि सार्थक है?
- निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उनपर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
पुष्प-पुष्प से तंद्रालस लालसा खींच लूँगा मैं,
अपने नव जीवन का अमृत सहर्ष सींच दूंगा मैं,
द्वार दिखा दूंगा फिर उनको।
हैं मेरे वे जहाँ अनंत -
अभी न होगा मेरा अंत।- कवि और कविता का नाम लिखिए।
- कवि पुष्पों को किस रूप में देखता है और उनमें क्या परिवर्तन चाहता है?
- कवि प्रकृति को अपनी ओर से क्या देना चाहता है?
- अंतिम पंक्ति 'द्वार दिखा ... अनंत' में कवि किस भाव को प्रकट करता है?
- कवि की चाहत क्या है?
CBSE Worksheet 01
वसंत ध्वनि
वसंत ध्वनि
Answers
- वसंत के आने से प्रकृति में अनेक सुन्दर परिवर्तन आ जाते है। पेड़-पौधों के नए पत्ते हो जाते है। डालियाँ फूलों से लद जाती है। कोयल कूकने लगती है।
- कवि ने मेरे वन में मृदुल वसंत कहकर वन रूपी जीवन में वसंत अर्थात युवावस्था के आगमन की ओर संकेत किया है। कवि का संदेश युवापीढ़ी को है।
- सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' ध्वनि कविता के कवि है।
- 'नवजीवन का अमृत' से अर्थ है कि कवि ने अपने उत्साह के माध्यम से फूलों, पत्तियों व कलियों में नवजीवन की कल्पना की है अर्थात् वह फूलों की उनींदी आँखों से आलस्य हटाकर उन्हें चुस्त व जागरूक करना चाहता है अर्थात् अपने-आपको प्रत्येक कार्य हेतु सक्रिय बनाना चाहता है।
- कवि में आत्मविश्वास कूट-कूटकर भरा हुआ है। वह जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण रखता है। अपने जीवन में मृदुल वसंत आने की बात कहकर वह खुद में नवयौवन के संचार की बात कहता है। इसी आधार पर वह अपने जीवन का अंत मानने को तैयार नहीं है।
- ‘ध्वनि’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है-आवाज़। इस कविता में कवि के अंतःकरण या अंतर्मन की आवाज़ प्रकट हुई है, इसलिए उसने कविता का शीर्षक ‘ध्वनि’ रखा है।
- कविता का शीर्षक 'ध्वनि' पूर्णतया सार्थक है क्योंकि यह ध्वनि कवि के अंतर्मन की अनुगूंज है जो अनंत में व्याप्त हो रही है। कवि को वसंत के आगमन पर पत्ते-पत्ते में; कण-कण में प्रकृति की सुंदरता, आभा और सुषमा दिखाई पड़ती है। वह इसे जीवंत रूप में देखना चाहता है और अपने कोमल स्पर्श से कलियों व फूलों के आलस्य व निंद्रा को मिटाकर अनंत काल तक खिलने हेतु प्रेरित करता है। वैसे ही कवि को भी यह आभास होता है कि वह भी अपने जीवन में वसंत की भाँति अपने कार्य करे, जिनकी कीर्ति व यश संपूर्ण संसार में फैल जाए। वह अभी अपने जीवन का अंत नहीं चाहता, वह तो सप्राण उस अनंत अर्थात् ईश्वर से मिलना चाहता है।
- कवि का नाम - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' कविता का नाम - ध्वनि
- कवि को पुष्प आलसी, निद्रामय व उदासी भरे दिखाई देते हैं तो वह उन्हें अपने स्पर्श से विमल, सुंदर और हर्षान्वित करना चाहता है।
- कवि प्रकृति को हराभरा, सुंदर, प्राणवान और आशावान देखना चाहता है।
- 'द्वार दिखा दूँगा फिर उनको हैं मेरे वे जहाँ अनंत' इस पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहता है कि वह प्रकृति को जीवत रूप में अपने जीवन के समान यशस्वी, तेजस्वी और कीर्तिमय बनाकर उस अनंत से मिलाना चाहता है जो अदृश्य व निराकार है।
- कवि की चाहत यह है की वह अपने अंत से पूर्व अपने जीवन की आभा, सुषमा व कर्तव्य भावना को यशस्वी बनाकर चारों और फैलाना चाहता है।