विपणन-पुनरावृति नोट्स
CBSE कक्षा 12 व्यवसाय अध्ययन
(भाग-2) पाठ-11 विपणन प्रबन्ध
पुनरावृति नोट्स
- बाज़ार:-
बाज़ार एक ऐसा स्थान है जहाँ क्रेता एवं विक्रेता मिलते हैं तथा क्रय एवं विक्रय करने के कार्य करते हैं। परम्परागत रूप से बाज़ार एक ऐसा स्थान माना जाता था क्रेता एवं विक्रेता किसी उत्पाद या किसी सेवा के आदान-प्रदान में लगे हुए हो। परन्तु अब व्यवसाय टेलीफोन, मेल, इन्टरनेट आदि के माध्यम से संचालित लिया जाता है। आधुनिक विपणन अर्थ में विपणन शब्द का व्यापक आशय है। यह किसी वस्तु या सेवा के वास्तविक एवं सम्मिलित क्रेताओं के समूह को संदर्भित करता है। - विपणनकर्ता या विक्रेता:-
यदि ग्राहक संतुष्टि का तलाशकर्ता है तो विपणनकर्ता सुतुष्टि का प्रदाता होता है। विपणनकर्ता वह व्यक्ति व संगठन हो सकता है तो वस्तु या उपलब्ध कराता है तथा ग्राहकों की आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करने के लिए इन्हें ग्राहकों को प्रस्तावित करता है। - विपणन:-
यह एक सामाजिक प्रक्रिया है जहाँ लोग मुद्रा अथवा कोई वस्तु उसके लिए महत्त्वपूर्ण हो, के बदले वस्तुओं एवं सेवाओं का आदन-प्रदान करते हैं।
कोई भी वस्तु किसी दूसरे के लिए कीमती है, उसका विपणन किया जा सकता है।- भौतिक उत्पाद- टी.वी. सेल फ़ोन आदि।
- सेवाएँ- विभिन्न पदों के लिए उम्मीदवारों का चुनाव
- व्यक्ति- विभिन्न पदों के लिए उम्मीदवारों का चुनाव
- स्थान- आगरा, ताजमहल आदि।
- विपणन की महत्वपूर्ण विशेषताएँ:-
- अपेशा एवं आवश्यकता:-
अपेशा:- किसी कमी को महसूस करना
आवश्यकता:- किसी महसूस की जाने वाली कमी का सम्भावित पूर्तिकर्ता वस्तु या सेवा
विपणनकर्ता का कार्य :- आवश्यकताओं को पहचानकर उनकी पूर्ति करना। - उत्पाद का सृजन:- उत्पाद तथा सेवाओं का सम्पूर्ण प्रस्ताव।
- ग्राक के योग्य मूल्य:- ज्यादा लाभ/ मुद्रा के बदले महत्व।
- विनिमय पद्धति:- उत्पाद तथा सेवाओं का मुद्रा अथवा किसी मूल्यवान वस्तु के साथ आदान प्रदान।
- विपणन प्रबन्ध का आशय एवं अवधारणा
- विपणन प्रबन्ध का आशय विपणन कार्यों से है।
- अपेशा एवं आवश्यकता:-
- विपणन प्रबन्ध व्यापार के महत्वपूर्ण कार्य क्षेत्र है। विपणन प्रबंध वस्तुओं तथा सेवाओं के नियोजन, संगठन, निर्देशन तथा गतिविधियों के नियंत्रण कि प्रक्रिया है ताकि ग्राहक की आवश्यकताएँ संतुष्ट की जा सके एवं संगठनात्मक उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके। विपणन प्रबन्ध निम्नलिखित कदमों या गतिविधियों को समाहित करता है।
- लक्षित बाज़ार का चयन करना:- उदाहरण के लिए विनिर्माता 5 वर्ष तक के बच्चों हेतु रेडिमेड गारमेन्ट बनाया जाना चुन सकता है।
- लक्षित बाज़ारों में मांग का निर्माण करना एवं ग्राहकों को आकर्षित करना:- ग्राहकों की संख्या को उनकी आवश्यकताओं एवं मांग का अनुमान लगाकर बढ़ाया जाता है।
- ग्राहक हेतु बेहतर मूल्य:- उत्पाद को प्रतियोगियों से बेहतर बनाना। इस प्रकार विपणन प्रबंध उत्पाद एवं सेवाओं में बेहतर मूल्य प्रदान करता है।
- विपणन एवं विक्रय:- एक तुलना
विपणन एवं विक्रयण का आशय एवं अवधारणा:-
विपणन एक व्यापक शब्द है। यह विभिन्न गतिविधियों के समूह को संदर्भित करता है, जिसमें विक्रय भी एक भाग होता है। विपणनकर्ता बिक्री करने से पूर्व विभिन्न कार्य जैसे उत्पादन के प्रकार एवं डिजाइनिंग का नियोजन करना, कीमत का निर्धारण, वितरण माध्यम का चयन आदि कार्य करता है।
विक्रयण प्रचार, संवर्द्धन एवं विक्रय कला के माध्यम से माल एवं बिक्री को संदर्भित करता है। विक्रयण का मुख्य उद्देश्य ग्राहक को उत्पाद बेचना होता है। विक्रयण से उत्पाद को रोकड़ में बदला जा सकता है। - विक्रयण तथा विपणन में अंतर:-
क्र.सं. आधार विक्रयण विपणन 1 क्षेत्र विक्रयण विपणन प्रक्रिया का केवल एक भाग है। विपणन एक व्यापक शब्द है जिसमें गतिविधियों जैसे-ग्राहकों की आवश्यकताओं की पहचान करना, कीमत तय करना इत्यादि। 2 ध्यान देना माल के अधिपत्य व स्वामित्व को विक्रेता को ग्राहक को हस्तांतरित करना। ग्राहकों की आवश्यकता संतुष्टि को अधिकतम करने पर जोर देता है। 3 माध्यम (उद्देश्य) उत्पाद को वरीयता दी जाती है। अधिकतम विक्रय करना होता है। ग्राहकों को राजा माना जाता है। ग्राहक संतुष्टि के माध्यम से लाभ कमाना होता है। 4 गतिविधियों यह उत्पाद से शुरू होता है तथा बिक्री पर समाप्त होता है। वास्तविक उत्पादन प्रारंभ होने से शुरू हो जाता है तथा विक्रय होने के बाद भी जारी रहता है। 5 रणनीतियां विक्रय संवर्द्धन तकनीकें समन्वित पिणन प्रयास - विपणन प्रबंध दर्शन
- उत्पादन प्रबंध दर्शन
मात्रा पर बल
ध्यान : उपलब्धता एवं वहनीराता - उत्पाद दर्शन:-
बल : गुणवत्ता पर
ध्यान : निरंतर गुणवत्ता सुधार पर - विक्रय दर्शन:-
बल : विक्रय मात्रा पर
ध्यान : ग्राहकों को आकर्षित करने पर आक्रामक संवर्द्धन तकनीकों का प्रयोग - विपणन अवधारणा:- आवश्यकता को पहचानकर उसे संतुष्ट करना
ध्यान : ग्राहक कि संतुष्टि - सामाजिक विपणन अवधारणा:-
- विपणन अवधारणा कजा विस्तार, सामाजिक कल्याण को ध्यान में रखते हुए ग्राहक कि संतुष्टि
- विपणन के सामाजिक, नैतिक एवं पर्यावर्णीय पक्षों को ध्यान में रखना
- उत्पादन प्रबंध दर्शन
- विपणन प्रबंध दर्शनों में अन्तर
दर्शन / आधार मूलक उत्पादन अवधारणा उत्पाद अवधारणा विक्रय अवधारणा विपणन अवधारणा समाज अवधारणा 1. प्रारंभ बिंदु कारखाना कारखाना कारखाना बाज़ार बाज़ार / समाज 2. मुख्य केंद्र बिंदु उत्पाद की मात्रा उत्पाद की गुणवत्ता, निष्पादन उत्पाद का स्वरूप उत्पाद में वृद्धि उपभोक्ता की आवश्यकताएँ उपभोक्ता की आवश्यकताएँ तथा समाज कल्याण 3. साधन उत्पाद की उपलब्धता एवं क्रय क्षमता उत्पाद में सुधार विक्रय एवं विक्रय प्रवर्तन एकीकृत विपणन एकीकृत विपणन 4. समाप्ति उत्पादन की मात्रा द्वारा लाभ अर्जन उत्पाद कीगुणवत्ता से लाभ प्राप्ति विक्रय की मात्रा से लाभ प्राप्ति ग्राहक की संतुष्टि से लाभ प्राप्ति उपभोक्ता संतुष्टि एवं कल्याण से लाभ प्राप्ति - विपणन के कार्य / विपणन गतिविधियाँ:-
- विपणन अनुसंधान:- सूचनाओं को एकत्रित करना तथा विश्लेषण करना। ग्राहक क्या खरीदना चाहता है? कब खरीदना चाहता है? कितनी मात्रा में कहाँ खरीदना चाहता है?
- विपणन नियोजन:- विपणन योजनाओं का निर्माण जिसमें उत्पाद का स्तर बढ़ाने, उत्पादों का संवर्द्धन करने इत्यादि की योजनाएँ शामिल होनी चाहिए तथा इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए गतिविधियों का कार्यक्रम बनाना चाहिए।
- उत्पाद का रूपांकन एवं विकास:- विपणन कर्ताओं को यह निर्णय लेना चाहिए कि किस उत्पाद का निर्माण करें? किस मॉडल तथा आकर का चुनाव करें? इत्यादि ताकि ग्राहक कि आवश्यकताओं की संतुष्टि हो पाए।
- मानकीकरण एवं ग्रेडिंग:- मानकीकरण से हमरा आशय पूर्वनिर्धारित विशिष्टताओं से युक्त उत्पादों का उत्पादन करने से है जिससे एक रूपता एवं नियमितता बनी रहे। इससे उत्पादों का निरीक्षण, परीक्षण एवं मूल्यांकन की आवश्यकता कम हो जाती है।
ग्रेडिंग से तात्पर्य उत्पादों को विभिन्न समूहों में वर्गीकृत करने की प्रक्रिया से है। ग्रेडिंग उन उत्पादों की करना आवश्यक हो जाता है जिनका उत्पादन पूर्वनिर्धारित मानकों के अनुसार करना संभव नहीं हो पता जैसे:- कृषि उत्पाद। - पैकेजिंग एवं लेबलिंग:- उत्पाद के लिए पैकेट तथा लेबलिंग का निर्माण।
- ब्रांडिंग:- निर्माणकर्ता को पहचान पाने तथा प्रतियोगियों के उत्पाद से अलग पहचान बनाना। उदाहरण:- वीडियोकॉन वाशिंग मशीन, ऊषा पंखे, लक्स साबुन।
- उत्पादों का मूल्य निर्धारण:- मूल्य निर्धारण उद्देश्यों को निश्चित करना, मूल्य रणनीतियों, मूल्य स्तरों आदि का निर्धारण।
- ग्राहक सहायता सेवायें:- विक्रयोपरांत सेवायें।
- संवर्द्धन:- ग्राहकों को उत्पाद के बारे में जानकारी प्रदान करना एवं उत्पाद क्रय करने हेतु प्रोत्साहित करना।
- भौतिक वितरण:- वितरण वाहिकाओं एवं उत्पादों के भौतिक गमन से संबंधित निर्णय।
- यातायातः- उत्पाद का भौतिक स्थानान्तरण।
- संचयन एवं संग्रहण:- उत्पादन एवं पूर्ति का सुगम प्रवाह बनाएँ रखने हेतु आवश्यक।
- विपणन मिश्र के तत्त्व
विपणन मिश्रण के तत्वों को चार वर्गों में वर्गीकृत किया गया है। ये तत्व इस प्रकार हैं:-
(1) उत्पाद, (2) मूल्य, (3) स्थान, (4) संवर्द्धन
इन तत्वों को प्रचलित रूप से विपणन के चार P's के नाम से जाना जाता है।विपणन उत्पाद मूल्य स्थान संवर्धन - उत्पाद मिश्रण
- ब्रांड निर्धारण
- ट्रेड मार्क
- पैकेजिंग
- लेबलिंग
- मूल्य निर्धारण
- मूल्य रणनीतियाँ
- वितरण के माध्यम
- माध्यमों के स्तर
- माध्यमों के चुनाव को निर्धारित करने वाले कारक
- भौतिक वितरण के निर्णय
- विज्ञापन
- विक्रय संवर्धन
- वैयक्तिक विक्रय
- प्रचार
- जन-संबंध
- विपणन मिश्रण के तत्त्व / घटक
- उत्पाद मिश्रण:- मुख्यत तत्त्व निम्नलिखित. हैं:-
- ब्रांडिंग:-
को हम नाम, चिन्ह्र, हस्ताक्षर अथवा उत्पाद के डिजाइन को प्रयोग करने की प्रक्रिया के रूप में स्पष्ट कर सकते है। उदाहरण:- पेप्सी, नाईक आदि। - एक अच्छे ब्राण्ड नाम के गुण:-
- साधारण एवं सूक्ष्म:- ब्रांड का नाम छोटा होना चाहिए। जैसे-टाटा, बाटा।
- सरल उच्चारण:- ब्राण्ड का नाम छोटा होना चाहिए जो आसानी से बोला जा सके जैसे लक्स, डालडा।
- सुझावात्मक:- ब्राण्ड का नाम ऐसा होना चाहिए जो उत्पाद के गुण बताये जैसे उजाला अधिक सफेदी बताता है।
- भिन्न:- ब्रांड का नाम ऐसा होना चाहिए जो अन्य ब्रांडो से भिन्न हो जिससे वस्तु को आसानी से पहचाना जा सके।
- ब्रांड के लाभ:-
- ब्रांड नाम से विज्ञापन में आसानी रहती है।
- उत्पाद कि स्थायी पहचान बन जाती है।
- उपभोक्ता आसानी से पहचान जाता है।
- पुनः विक्रय को प्रोत्साहन मिलता है।
- ब्राण्डिंग उत्पाद के विशेष स्तर को सुनिश्चित करता है। यदि गुणवत्ता के कोई अन्तर होता है तो ग्राहक उत्पादकों या वितरणकर्ताओं से शिकायत कर सकते हैं।
- पैकेजिंग:-
उत्पाद का डिब्बा अथवा कागज़ तैयार करना। अच्छी पैकेजिंग अक्सर उत्पाद को बेचने में मदद करती है। इसलिए इसे शांत विक्रयकर्ता कहा जाता है। - पैकेजिंग का कार्य:-
- प्राथमिक पैकेजे:- उत्पाद का निकटतम पैकेज होता है।
जैसे:- टॉफी का प्लास्टिक कवर, माचिस बॉक्स - द्वितीयक पैकेज:- उत्पाद को प्रयोग किये जाने तक सुरक्षा की दृष्टिकोण से अतिरिक्त पर्त चढ़ाई जाती है, जैसे टूथपेस्ट कि ट्यूब को एक अतिरिक्त कार्ड, बोर्ड बॉक्स में बन्द किया जाता है।
- परिवहन पैकेज:- परिवहन एवं भण्डारण की प्रक्रिया में उत्पाद को सुरक्षित रखना होता है। जैसे-टूथपेस्ट के बोक्सों को कारपोरेटेड बाक्सों में बन्द करके भेजा जाता है।
- प्राथमिक पैकेजे:- उत्पाद का निकटतम पैकेज होता है।
- पैकेजिंग के कार्य:-
- उत्पाद पहचान:- पैकेजिंग का उत्पाद का कार्य करती है।
- उत्पाद सुरक्षा:- पैकेजिंग का मुख्य कार्य धूल, मकोड़े, नमी व टूट-फूट से सुरक्षा प्रदान करना है।
- सुविधा:- पैकेजिंग उत्पाद को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने, स्टॉक करने व उपभोग रखने में सुविधा प्रदान करती है।
- पैकेजिंग के लाभ या महत्त्व:-
- स्वास्थ्य व स्वछता बनाए रखने का स्तर ऊँचा होता है:- लोग के स्वास्थ्य के प्रति अधिक सचेत होने के कारण वे पैकड वस्तुएं खरीदना पसंद करते है। क्योंकि इनमें मिलावट कि सम्भावना कम होती है।
- नवीनता के अवसर:- पैकेजिंग के लगातार बढ़ते उपयोग से इस क्षेत्र में शोधकर्ताओं को नवीनता का अवसर प्राप्त हुए है।
- उत्पादों का विभेदीकरण:- पैकेज के रंग, पदार्थ व आकार के कारण विक्रेता उत्पादों में अंतर कर सकता है।
- लेबलिंग:-
लेबलिंग का अर्थ है पैकेज पर पहचान चिन्ह अंकित करना। लेबल सूचना का स्रोत होता है जिस पर उत्पाद का नाम निर्माता का नाम, निर्माता का नाम, उत्पाद के तत्त्व समापन और निर्माण की तिथि, प्रयोग के लिए समान्य निर्देश, भार, मूल्य इत्यादि जैसी सूचनाएँ होती है। - लेबल निम्नलिखित कार्यों पर निष्पादन करते हैं:-
- उत्पाद को पहचानना:- विभिन्न प्रकार के उपलब्ध उत्पादों में से उत्पाद को पहचानने में लेबल, ग्राहकों की सहायता करता है।
- सूचना का स्रोतः- निर्माता उत्पाद से संबंधित सभी सूचनाएँ छापता है।
- श्रेणीयन में सहायता:- लेबल की सहायता से उत्पादों को विभिन्न वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है। जैसे:- Brook Bond, Red Lable, Brook Bond: Yello Lable, Brook Bond Green lable इत्यादि।
- विक्रय को बढ़ाना:- आकर्षक और रंगीन लेबल ग्राहक को लुभाते है और उसे उत्पाद खरीदने के लिए प्रोत्साहित करते है।
- वैधानिक आवश्यकता:- वैधानिक रूप से सभी उत्पादों पर Batch Number तत्त्व, अधिकतम फूटकर मूल्य, भार छापना अनिवार्य है तथा सिगरेट के पैकेट पर वैधानिक चेतावनी की यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, जहरीली और खतरनाक सामग्री के मामले में उचित सुरक्षा चेतावनियों का डालना अनिवार्य है।
- मूल्य मिश्रण:- कीमत ऐसा मूल्य है जिसे क्रेता द्वारा उत्पाद या सेवा के बदले विक्रेता को दिया जाता है। ग्राहक इस तत्त्व के प्रति अत्यन्त संवेदनशील होता है। वस्तु कि कीमत वस्तु द्वारा प्रस्तावित प्रतियोगिता के अनुरूप होती है तथा ग्राहक उत्पाद से मिलने वाली उपयोगिता के बराबर कीमत देने के लिए सदैव तैयार रहता है।
- मूल्य निर्णय को निम्नलिखित घटक प्रभावित करते है।
- कीमत निर्धारण के उद्देश्य:-
- यदि लाभ अधिकतमीकरण का उद्देश्य फर्म तय करती हैं तो वह मूल्य को अत्यधिक बढ़ाएगी।
- यदि फर्म कटु प्रतिस्पर्द्धा बॉक्सर में बनी रहना चाहती है तो वह कम मूल्य रखेगी।
- यदि फार्म बाज़ार में भागीदारी बढ़ाना चाहती है तो वह मूल्य कम रखेगी।
- उत्पादन लागतः- पूर्ति कि अपेशा माँग अधिक होने कि स्थिति में मूल्य अपेक्षाकृत अधिक निश्चित किया जा सकता है।
- प्रतियोगी फर्मो का मूल्य:- मूल्य निर्धारण के समय प्रतियोगी फर्मो को मूल्य पर विचार किया जाना अति आवश्यक है।
- सरकारी नियम:- यदि किसी वस्तु अथवा सेवा का मूल्य सरकारी नियमों के अनुसार निश्चित किया जाना जरूरी है।
- स्थान मिश्रण / भौतिक वितरण मिश्रण:- निर्माता से उपभोक्ता तक वस्तुओं कि भौतिक गतिशीलता से संबंधित सभी गति विधियाँ। जैसे:-
- आदेश का प्रकियण:- ग्राहकों के आर्डर को समय पर उपलब्ध करवाना जिससे व्यावसायिक लाभ एवं साख बढ़ेगी।
- परिवहन:- वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर, जहाँ इनकी आवश्यकता होती है, पहुंचकर वस्तुओं की उपयोगिता में वृद्धि करता है।
- संग्रहित माल पर नियंत्रण:- स्टॉक में कितना माल हमेशा बनाए रखा जाए, यह वितरण उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है तथा लागत एवं ग्राहक संतुष्टि में संतुलन बना रहे।
- भंडारण:- गोदाम संग्रहण की आवश्यकता इसलिए उत्पन्न होती है क्योंकि उत्पाद के उत्पादन समय तथा उपभोग के समय में बड़ा अंतर होता है।
प्रत्यक्ष माध्यम- निर्माता ग्राहक अप्रत्यक्ष माध्यम- निर्माता फुटकर व्यापारी ग्राहक निर्माता थोक विक्रेता फुटकर व्यापारी ग्राहक निर्माता एजेंट थोक विक्रेता फुटकर व्यापारी ग्राहक

- वितरण माध्यम के चुनाव को निर्धारित करने वाले कारक
वितरण माध्यम चुनाव एक अत्यंत महत्वपूर्ण विपणन निर्णय है जो कि संगठन के निष्पादन को प्रभावित करता है- कि एक संगठन प्रत्यक्ष विपणन स्रोत का चुनाव करेगा अथवा लम्बे स्रोतों का चुनाव करेगा जिसमें अनेक मध्य शामिल होंगे यह अनेक कारकों से प्रभावित होता है। वितरण माध्यम के चुनाव को प्रभावित करने वाले कारक :-
(i) बाज़ार का आकार एवं प्रकृति – अधिक ग्राहक – लम्बी वाहिका कम ग्राहक : छोटी वाहिका (i) उत्पाद का इकाई मूल्य महंगा – छोटी वाहिका रास्ता – लम्बी वाहिका (i) कंपनी की वित्तीय शक्ति मजबूत छोटी वाहिका कमजोर-लम्बी वाहिका (ii) भौगौलिक संकेन्द्रण उपभोक्ता सीमित क्षेत्र – छोटी वाहिका फैले हुए ग्राहक – लम्बी वाहिका (ii) अधिक जटिल छोटी वाहिका कम जटिल – लम्बी वाहिका (ii) नियंत्रण का स्तर – अधिक-छोटी वाहिका कम-लम्बी वाहिका (iii) आदेशों का आकार कम – लम्बी वाहिका अधिक-छोटी वाहिका (iii) उत्पाद कि प्रकृति शीघ्र नाशवान-छोटी व हिका गैर क्षयशील-लम्बी वाहिका (iii) नियंत्रण का स्तर अधिक छोटी वाहिका कम-लम्बी वाहिका - संवर्द्धन:- विपणन कर्ता द्वारा संचार के विभिन्न उपकरण या तत्वों को अपने ग्राहकों को सुचना देने तथा उनके आग्रह करने हेतु अपनाया जाता है।
- उपकरण / तत्त्व
विज्ञापन:- संवर्द्धन सर्वाधिक प्रभावी उपकरण माना जाता है। यह संचार का अवैयक्तिक रूप है जो विपणनकर्ता द्वारा अपने उत्पाद या सेवा के संवर्द्धन के लिए अपनाया जाता है। जिसके लिए भुगतान किया जाता है।
सर्वाधिक विधियाँ- समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, टेलीविज़न, रेडियो। - विज्ञापन के विरुद्ध आक्षेप:-
विज्ञापन अत्यत उपयोगी होने के बाद भी आक्षेपों से परे नहीं है। विज्ञापन की आलोचनाएँ इसके दुरूपयोग के कारण होती है। विज्ञापन के प्रति निम्नलिखित आक्षेप लगये जाते है:-- लागतों में वृद्धि:- विज्ञापन करने के लिए संस्था को बहुत अधिक धन खर्च करना पड़ता है। इससे उत्पादन लागतों में वृद्धि होती है। इस खर्च को पूरा करने के लिए वस्तु की कीमत में वृद्धि करनी पड़ती है।
- क्रेताओं को भ्रमित करना:- कई बार विज्ञापन को तोड़-मरोड़कर दिखाया जाता है। यह सभी विज्ञापन अपनी वस्तु को सर्वोत्तम बताकर ग्राहकों में भ्रम उत्पन्न करते है। इसलिए चयन करना कठिन हो जाता है।
- घटिया उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहित करना:- विज्ञापन द्वारा प्रत्येक विक्रेता अपने उत्पाद को बढ़िया बताता है। अतः क्रेता यह निर्णय नही कर पाता कि वास्तव में कौन सा उत्पाद बढ़िया है। जिसके कारण कई बार पूरे दाम देने पर भी अच्छी क्वालिटी का माल नहीं मिल पाता।
- विज्ञापन का महत्व:
- ग्राहकों की संतुष्टि और विश्वास में वृद्धि
- उत्पाद की मांग बढ़ाने में सहायक
- बाज़ार हिस्सा बढ़ाने में सहायक
- रोजगार बढ़ाने में सहायक
- आर्थिक विकास में सहायक
- विभिन्न प्रकार के उत्पादों की जानकारी
- शोषण का भय नही
- कुछ विज्ञापन रूचिकर नही होते:- कई बार विज्ञापन में अभद्र भाषा एवं चित्रों का प्रयोग किया जाता है। इससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचती है।
- सामाजिक मूल्यों को कम करना:- विज्ञापन सामाजिक मूल्यों को घटाकर भौति मूल्यों को बढ़ावा देता है। यह ग्राहकों को अधिक से अधिक उत्पादों को क्रय करने कि प्रेरणा देता है। इसे एक सामाजिक बुराई मानते हुए कहा जा सकता है कि विज्ञापन से सामाजिक मूल्यों की अवहेलना होती है।
आज के बदले हुए आर्थिक वातावरण में विज्ञापन-विपणन का एक महत्वपूर्ण है जिसके बिना ग्राहकों को वस्तु की जानकारी देना असंभव होगा। इसलिए ये कहना गलत होगा कि सभी विज्ञापन सामाजिक बर्बादी है। - व्यक्तिगत विक्रय:- व्यक्तिगत विक्रय का अभिप्राय किसी वस्तु के संभावित क्रेताओं से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित करना है।
- व्यक्तिगत विक्रय की विश्लेषण:-
- व्यक्तिगत संपर्क स्थापित होता है।
- मौखिक वार्तालाप।
- संदेहों का तुरंत समाधान।
- अतिरिक्त सूचनाओं की प्राप्ति।
- संबंधो का विकास होता है।
- एक अच्छे विक्रय कर्ता के गुण:-
- शारीरिक गुण:- शारीरिक गुणों के अन्तर्गत व्यक्तित्व, कार्य शक्ति, स्वास्थ्य एवं सहनशीलता को शामिल किया जाता है।
- मानसिक गुण:- मानसिक गुणों में चातुर्य, तीव्र स्मरण शक्ति, पहल करने की शक्ति एव आत्मविश्वास शामिल किया जाता है।
- तकनीकी क्षमताएँ:- उसे अपने उत्पाद के गुणों, मूल्य और उपलब्ध विकल्पों के बारे में पूर्ण एवं अद्यतन जानकारी होना चाहिए। उसे अपनी फर्म द्वारा किए जाने वाले कार्यों की प्रकृति के बारे में भी जागरूक होना चाहिए।
- अच्छी सम्प्रेषण कौशल:- वह ग्राहकों के साथ एक अच्छी बातचीत स्थापित करने में सक्षम होना चाहिए। उसे ग्राहकों से पूर्ण विश्वास के साथ सम्प्रेषण करना चाहिए और उनकी सभी जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का संतोंषजनक समाधान करने में सक्षम होना चाहिए।
- ईमानदारी:- यह एक अच्छे विक्रयकर्ता का अत्यन्त महत्वपूर्ण गुण है। अपनी फर्म की अच्छी साख स्थापित करने के लिए उसे पूर्ण रूप से ईमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ होना चाहिए। एक विक्रयकर्ता जो निकुष्ट गुणवत्ता की वस्तुएं विक्रय करता है, अधिक मूल्य वसूलता है, गलत सूचनाएँ प्रदान करता है अथवा अतिश्योक्ति पूर्ण दावे करता है, दीर्घकाल में अपने फर्म की ख्याति में गिरावट का कारण करता है।
- आभार:- एक विनम्र विक्रयकर्ता के लिए अपने ग्राहक का विश्वास जीतना एवं अपने उत्पाद को बेचना आसान होता है।
- लगन:- एक विक्रयकर्ता में कभी न हार मानने की प्रवृत्ति होनी चाहिए क्योंकि उसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को अधिक विक्रय करना होता है।
- विश्वास जीतने की क्षमता:- एक विक्रयकर्ता में अपने ग्राहकों में यह विश्वास उत्पन्न करने की क्षमता होनी चाहिए कि वे जो उत्पाद खरीद रहे है, वह बाज़ार में उपलब्ध सबसे अच्छा उत्पाद है।
- विक्रय संवर्धन:- वह लघु आवधिक प्रेरक जो ग्राहकों को उत्पाद अथवा सेवाओं को तुरंत क्रय करने के लिए उकसाते हैं।
- विक्रय संवर्धन की तकनीकें:-
- कटौती:- ज्यादा माल खत्म करने के लिए विशेष मूल्य पर उत्पाद प्रस्तावित करना।
- छूट:- मूल्यों पर छूट देकर क्रेताओं को ज्यादा क्रय करने के लिए प्ररित करना।
- नमूनों का वितरण:- ग्राहक को मुफ्त नमूना देना, उसे उत्पाद का प्रयोग करने तथा उसके आदी हो जाने के लिए तैयार करना।
- लक्की ड्राॅ:- उदाहरण:- वस्त्रों के क्रय पर लक्की ड्रॉ के कूपन देना तथा कार जीतने का प्रस्ताव। विपणन कर्ता द्वारा संचार के विभिन्न उपकरण या तत्वों को अपने ग्राहकों को अपने ग्राहकों को सूचना देना तथा उनसे आग्रह करने हेतु अपनाया जाता है।
- 0 प्रतिशत पर पूरा पूरा वित प्रदान करना।
- प्रतियोगिता करवाना।
- उत्पाद संयोजन करना:- एक उत्पाद के क्रय किये जाने पर अन्य उत्पाद को उपहार में दिया जाना।
- तत्काल ड्रा एवं उपहार देना:- इस विधि के अन्तर्गत एक विशेष उत्पाद खरीदने पर उसी समय एक कार्ड को खुरचने के लिए कहा जाता है और उस पर वस्तु उपहार के रूप में दी जाती है।
- मात्रात्मक उपहार देना:- यह विशेष क्रय पैकेज पर सामान के अतिरिक्त मात्रा देने को प्रस्तावित करने के संबंध में होता है। जैसे-तीन सिंथोल साबुन खरीदने पर एक साबुन मुफ्त।
- वापसी:- पुराने क्रय का कोई प्रमाण जैसे:- रैपर,रसीद आदि प्रस्तुत करने पर ग्राहक को नए क्रय के समय उत्पाद के मूल्य में कुछ कमी करना।
- उपयोग योग्य लाभ:- रू. 5000 के मूल्य के उत्पाद क्रय करने पर दो Movie टिकट प्रदान करना।
- जन संपर्क अवधारणा:-
जन संपर्क अवधारणा के अनुसार विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का प्रयोग करके व कंपनी की साख की सुरक्षा एवं उत्पाद हेतु कार्य करना शामिल है। यह ग्राहकों, शेयरधारकों, कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं, निवेशकों आदि के साथ संबंधों को मजबूत बनाने का माध्यम है। यह समाचारों द्वारा, कॉर्पोरेट जगत के नेताओं द्वारा दिए गये भाषणों के जरिए खेल, संगीत, सेमीनार आदि के आयोजन द्वारा किया जाता है। जन संपर्क अवधारणा बहुत सी कार्यनीतियों का समामेलन है। इसमें सवतंत्र मीडिया सूत्रों का इस्तेमाल अनुकूल क्वरेल पाने के लिए किया जाता है। विशिष्ट उत्पादों, सेवाओं और घटनाओं आदि से लेकर पूर्ण संगठन के ब्रांड को प्रत्साहित करना शामिल है। - इस्तेमाल किए जाने वाले जनसंपर्क साधन इस प्रकार है:-
- प्रेस रिलीज / प्रेस विज्ञापितः- एक संगठन से संबंधित घटना, अभिनय या समाचार योग्य विषय को प्रेस के द्वारा सूचित करना, प्रेस रिलीज कहलाता है। यह कहानी की तरह आकर्षक शीर्षक के साथ मीडिया स्रोंतों जैसे टेलीविज़न, रेडियो, इन्टरनेट के द्वारा सभी तक पहुँचाया जाता है।
- प्रेस किट:- यह कंपनी के द्वारा विभिन्न सदस्यों को कंपनी के उत्पादों और सेवाओं की रूपरेखा देने वाला व्यापक स्रोत है। इनमें निम्न जानकारियाँ दी जाती है:-
- कम्पनी की संक्षिप्त जीवनी
- वरिष्ट प्रबंधन की रूपरेखा
- ग्राहकों से टिप्पणी कंपनी से संबंधित
- ग्राहकों और पत्रिकाओं में दिए गए लेख आदि।
- विवरणिका:- यह संगठन द्वारा प्रकाशित पुस्तिका है जिसमें संगठन की पृष्ठ भूमि, उसकी आचार संहिता, दृष्टिकोण, मिशन, उसके अतीत, वर्तमान और भविष्य की परियोजनाओं आदि की जानकारी होती है। उदाहरण- नए कर्मचारियों को दी जाने वाली विवरणिका जिसमें संगठन का सार होता है।
- News Letter / समाचार पत्र:- यह नियमित अंतराल पर विशेष प्रकार के व्यक्तियों के लिए केन्द्रित प्रकाशन है।
यह कम औपचारिकता से प्रस्तुत किया गया है।
उदाहरण:- कॉलेज में नियमित रूप से घटने वाली गतिविधियाँ समूह समजता द्वारा दी जाती है। - घटनाएँ:- घटनाओं में समाचारों के लिए कुछ खास होता है इसमें स्थान समय, व्यक्ति, गतिविधियाँ शामिल है, एक घटना में कई-छोटी घटनाएँ शामिल हो, सकती है जैसे:- भाषण प्रतियोगिता आदि।
- सम्मेलन और सेमिनार:- सम्मेलन और सेमिनार लोगों को संगठन के बारे में जागरूक करने के लिए आयोजित किये जाते है। उदाहरण के लिए यात्रा आयोजन कम्पनियाँ आमतौर पर संभावित ग्राहकों को फोन द्वारा संपर्क करती हैं व उन्हें विभिन्न क्षेत्रों के लिए यात्रा करने के पैकेज बताती है।
- वेबसाइट:- एक संगठन के लिए उसकी वेबसाइट बाह्य दुनिया के लिए खिड़की कि तरह काम करती है। यह सिर्फ सदस्यों के इस्तेमाल के लिए ही नहीं परन्तु गैर सदस्यों के लिए भी कम्पनी के बारे में सीधा जानकारी प्राप्त करने का साधन है।
- एक संगठन में जनसंपर्क अवधारणा (Public Relations) की भूमिका:-
- व्यापर के सुव्यवस्थित ढंग से चलने एवं उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु।
- कम्पनी की छवि के निर्माण से उत्पादों पर भी अनुकूल प्रभाव डालना।
- स्थापित उत्पादों में रुचि बनाए रखने और नए उत्पाद की बाज़ार में भूमिका बनाने के लिए।
- प्रतिकूल प्रचार का सामना करते उत्पादों की छवि को सकारात्मक करना।
उदाहरण के लिए शीतल पेय की बड़ी कम्पनियाँ पेप्सी, कोका कोला जब कीटनाशक पाए जाने पर विवाद में फंसी थी तो विभिन्न क्षेत्रों से उन्हें आलोचना सहनी पड़ी थी। क्षति को नियंत्रित करने के लिए "PR" का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया था। - यह नए और मौजूदा उत्पादों को बढ़ावा देने में विज्ञापन के पूरक का कार्य करता है।