वसंत दीवानों की हस्ती - नोट्स

CBSE पुनरावृति नोट्स
CLASS - 8 hindi
पाठ - 4
दीवानों की हस्ती

- भगवतीचरण वर्मा
पाठ का सारांश- इस कविता में दीवाने अर्थात मस्त जीनेवाले उन वीरों की मनोदशा का वर्णन है, जो मातृभूमि को स्वतंत्र कराने के लिए अपनी जान हथेली पर लिए फिरते थे। यह कविता देश की आज़ादी मिलने के पहले लिखी गई है।
‘दीवानों की हस्ती’ नामक इस कविता में दीवानों की मनोदशा और क्रियाकलापों का वर्णन है। ये दीवाने वे वीर हैं जो देश को आज़ाद कराने के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर देने की भावना रखते हैं। उनकी भावना में देशप्रेम तथा देशभक्ति कूट-कूटकर भरी है। आज़ादी के उन दीवानों को देश की महानता सर्वोपरि लगती है। देश को स्वतंत्र कराने की चाहत में वे अंग्रेज़ी सरकार से यहाँ-वहाँ बचते फिरते हैं। वे बेफ़िक्र रहनेवाले हैं। उनकी टोली पर अंग्रेज़ी सरकार के डर का कोई असर नहीं होता। वे मस्त प्रकृति के लोग जहाँ भी जाते हैं, वहाँ खुशियाँ छा जाती हैं। उन्हें देखकर कुछ लोग हर्षित होते हैं जबकि उनकी यह दशा (अंग्रेज़ी सरकार से बचकर घूमने-फिरने की स्थिति) देखकर कुछ की आँखों में आँसू आ जाते हैं। उन्हें जल्दी वापस जाता देख लोगों ने उनसे पूछना चाहा कि तुम अभी तो आए हो और अभी किधर जा रहे हो। बेफ़िक्री में जीने वाले लोगों ने उनसे अपने आने के बारे में न पूछने को कहा। उनका काम एक जगह रुकना नहीं है। वे लोगों की मुसीबतें तथा दुख लेने तथा अपनी खुशियाँ देने का प्रयास करते हैं। उनका कहना है कि वे सुख-दुख को समान भाव से ग्रहण करते हैं। उन्हें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते ही जाना है। वे दुखों तथा अभावग्रस्त लोगों के बीच अपना प्यार लुटाकर चले जाते हैं। उन्हें अपनी असफलता के प्रति दुख भी है, क्योंकि देश को स्वतंत्रता दिलाना इतना आसान नहीं है। वे देशवासियों को आबाद रहने की शुभकामना देते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ जाते हैं। उन्होंने अपने आने-जाने तथा बंदी रहने या स्वतंत्र रहने के नियम स्वयं बनाए थे। वे उस बंधन को तोड़कर आगे जा रहे हैं।