भारतीय संविधान में अधिकार - महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
CBSE कक्षा 11 राजनीति विज्ञान
पाठ-2 भारतीय संविधान में अधिकार
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
पाठ-2 भारतीय संविधान में अधिकार
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
एक अंकीय के प्रश्नोत्तर-
- अधिकारों का घोषणा-पत्र किसे कहते है?
उत्तर- संविधान द्वार प्रदत्त और संरक्षित अधिकारों की सूचि को अधिकारों का घोषणा पत्र कहते है। - किसी एक व्यक्ति के नागरिक अधिकारों को अन्य व्यक्ति या निजी संगठन से खतरा है। इस स्थिति में खतरे से सुरक्षा कौन प्रदान करेगा?
उत्तर- सरकार। - मोतीलाल नेहरु समिति क्या थी?
उत्तर- 1928 में, स्वतंत्रता सेनानी मोती लाल नेहरू द्वारा अंग्रेजों से भारतीयों के लिए अधिकारों के एक घोषणा पत्र की मांग की, उसे नेहरू समिति कहा गया। - सामान्य अधिकार किसे कहते है?
उत्तर- वे अधिकार जो साधारण कानूनों की सहायता से लागू किये जाते है। - मौलिक (मूल) अधिकारो से क्या अभिप्राय है?
उत्तर- क्योंकि यह व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास में सहायक होते है। - दक्षिण-अफ्रीका का संविधान कब लागू हुआ?
उत्तर- दिसम्बर 1996 में - दुनियां में संभवतः सबसे अधिक व्यापक अधिकार किन नागरिकों को मिले हैं?
उत्तर- दक्षिण-अफ्रीका के नागरिकों को। - क्या मौलिक अधिकार पूर्ण अधिकार है?
उत्तर- नहीं, यह पूर्ण नहीं हैं कुछ विशेष परिस्थितियों (आपातकाल) में निलम्बित भी किया जा सकता है। - भारतीय संविधान के किस भाग में मौलिक अधिकार वर्णित हैं?
उत्तर- भाग तीन में। - कौन-सा अनुच्छेद कहता है कि आरक्षण जैसी नीति को समानता के अधिकार के उल्लंघन के रूप में नही देखा जा सकता।
उत्तर- अनुच्छेद-16 (4)। - निवारक नजरबंदी किसे कहते है?
उत्तर- किसी व्यक्ति को इस आशंका के आधार पर गिरफ्तार करना कि वह कोई गैर-कानूनी कार्य करने वाला है, इसे ही निवारक नजरबंदी कहते है। - परमादेश का क्या अर्थ है?
उत्तर- अर्थ है-हम आदेश देते हैं। निचली अदालत अथवा किसी व्यक्ति को अपना कर्तव्य करने के लिए मजबूर करना। - अधिकार पृच्छा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- यह आदेश (रिट) उस व्यक्ति के खिलाफ जारी होता है, जिसने गलत तौर पर पद हासिल कर लिया हो। - उत्प्रेषण रिट क्या होती है?
उत्तर- उत्प्रेषण रिट का अर्थ है- हमें सूचना दी जाएं। इसमें निचली अदालत को किसी विशेष मामले का ब्यौरा उच्च या उच्चतर अदालत को देने का आदेश होता है। - संविधान का हृदय और आत्मा किस अधिकार को कहा जाता है?
उत्तर- संवैधानिक उपचारों के अधिकार को।
दो अंकीय के प्रश्नोत्तर-
- भारतीय संविधान में वर्णित छ: अधिकारों को मूल (मौलिक) की संज्ञा क्यो दी गई है?
उत्तर- यह अधिकार वर्षों से चले आ रहे मूल्यों एवं सिद्धान्तों का प्रतीक है। इनके द्वारा व्यक्ति का सर्वागीण विकास होता है। - मौलिक अधिकारों को किस परिस्थिति में निलम्बित किया जा सकता है?
उत्तर- मौलिक अधिकार, विशेषकर अनुच्छेद-19 आपातकाल की स्थिति में निलम्बित किए जा सकते हैं। - भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का क्या अर्थ है?
उत्तर- इसका अर्थ है कि व्यक्ति अपने विचारों को शब्दों के रूप में लिखकर, प्रेस द्वारा छपवाकर, तस्वीरों के द्वारा या कियी अन्य माध्यम से लागों तक पहुंचाना। - बंधुआ मजदूरी से आप क्या समझते है?
उत्तर- जमींदारों, सूदखोरों और अन्य धनी लोगों द्वारा गरीबों से पीढ़ी दर पीढ़ी मजदूरी करवाना। अब इसे अपराध घोषित कर दिया गया। - बन्दी प्रत्यक्षीकरण क्या है?
उत्तर- न्यायालय द्वारा किसी गिरफ्तार व्यक्ति को न्यायालय/जज के सामने उपस्थित होने/करने का आदेश दिया जाना बंदी प्रत्यक्षीकरण कहलाता है। - शोषण के विरूद्ध अधिकार के अन्तर्गत कौन-से दो प्रावधान है?
उत्तर- i. अनुच्छेद-23 राज्य पर सकारात्मक जिम्मेदारी डालता है कि वह व्यक्तियों के व्यापार, तथा बेगारी एवं बंधुआ मजदूरी पर प्रतिबंध लगाए।
ii. अनुच्छेद-14, राज्य 14 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों को खदानों, कारखानों एवं खतरनाक काम करवाने पर रोक लगाए। - मौलिक अधिकारों के दो महत्व लिखिए।
उत्तर- i. नागरिकों के सर्वागीण विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
ii. भारतीय लोकतंत्र का आधार हैं। - कानूनी अधिकार कौन-से होते हैं?
उत्तर- कानूनी अधिकार वे अधिकार होते है जिन्हें किसी देश के संविधान ने सूचीबद्ध कर रखा है। तथा जिसे उल्लघंन करने पर उल्लंघनकर्ता को सजा मिलती है। - क्या नीति निर्देशक तत्व न्याय संगत हे?
उत्तर- नहीं, नीति निर्देशक तत्व न्याय संगत नहीं है। इनके उल्लंघन पर आप न्यायालय में नहीं जा सकते। - मौलिक अधिकार एवं नीति निर्देशक तत्वों में अन्तर लिखिए।
उत्तर- अन्तर-- मौलिक अधिकार न्याय संगत है। नीति निर्देशक तत्व न्याय संगत नहीं है।
- मौलिक अधिकारों का स्वरूप निषेधकारी है। जबकि नीति निर्देशक तत्वों का स्वरूप सकारात्मक है।
- मौलिक अधिकारों एवं नीति निर्देशक तत्वों के मध्य विवाद केन्द्र में कौन-सा अधिकार था?
उत्तर- सम्पति का अधिकार, जिसे 44वें संविधान संशोधन द्वारा मौलिक-अधिकारों की सूची से निकाल दिया गया।
चार अंकीय के प्रश्नोत्तर-
- हमें मौलिक अधिकारो की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर- मौलिक अधिकार व्यक्ति के मूल विकास, सर्वागीण विकास के लिए आवश्यक हैं। समाज में समानता, स्वतंत्रता, बन्धुत्व, आर्थिक, सामाजिक विकास लाने में सहयोग प्रदान करते हैं। - भारतीय संविधान में कब किस संशोधन द्वारा मौलिक कर्तव्यों को जोड़ा गया? किन्हीं तीन कर्तव्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर- 1976 में, 42 वें संविधान संशोधन द्वारा, देश की रक्षा करना, देश में भाईचारा बढ़ाना, पर्यावरण की रक्षा करना, संविधान का सम्मान। - राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पर टिपण्णी लिखिए।
उत्तर- 2000 में राष्ट्रीय मानवाधिकार का गठन। सदस्य-एक भूतपूर्व सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश, एक भूतपूर्व उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश तथा मानवाधिकारों के संबंध में ज्ञान रखने या व्यवहारिक अनुभव रखने वाले दो सदस्य होते हैं। कार्य-शिकायते सुनना, जांच करना तथा पीड़ित को राहत पहुंचाना। - हमारे संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों की चार विशेषताएं लिखिए।
उत्तर- मौलिक अधिकारों की विशेषताएं-- विस्तृत एवं व्यापक-संविधान के भाग तीन की 24 धाराओं में वर्णित।
- मौलिक अधिकार बिना भेदभाव के सभी के लिए।
- मौलिक अधिकार असीमित नहीं है-आपातकाल में इन पर प्रतिबंध लग सकता है।
- न्याय संगत है-किसी के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर वह न्यायालय जा सकता है।
- अनुच्छेद 19 में वर्णित स्वतंत्रताओं मे से किन्हीं चार को समझाइए।
उत्तर- अनुच्छेद-19- भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
- संघ/समिति बनाने की स्वतंत्रता।
- सभा करने की स्वतंत्रता।
- भ्रमण करने की स्वतंत्रता।
- व्यवसाय करने की स्वतंत्रता। (कोई चार)
- नीति निर्देशक तत्व क्या है? इनकी तीन प्रमुख बातें लिखिए।
उत्तर- मौलिक अधिकारों के अलावा जन कल्याण एवं राज्य के उत्थान के जरूरी नियमों को 'राज्य के नीति निर्देशक सिद्धान्त' के रूप में जाना जाता है। ये इन तत्वों के पीछे नैतिक शक्ति काम करती है। तीन प्रमुख बातें-- वे लक्ष्य और उद्देश्य जो एक समाज के रूप में हमें स्वीकार करने चाहिए।
- वे अधिकार जो नागरिकों को मौलिक अधिकारों के अलावा मिलने चाहिए।
- वे नीतियां जिन्हें सरकार को स्वीकार करना चाहिए।
पांच अंकीय के प्रश्नोत्तर-
- निम्न लिखित गद्यांश को पढ़िए तथा नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
"संविधान में कुछ नीति निर्देशक तत्वों का समावेश तो किया गया है लेकिन उन्हें न्यायलय के माध्यम से लागू करवाने की व्यवस्था नहीं की गई। इसका अर्थ यह हुआ कि यदि सरकार किसी निर्देश को लागू नहीं करती तो हम न्यायलय में जाकर यह मांग नहीं कर सकते कि उसे लागू कराने के लिए न्यायलय सरकार को आदेश दें। संविधान निर्माताओं का मानना था कि इन निर्देशक तत्वों के पीछे जो नैतिक शक्ति है वह सरकार को बाध्य करेगी कि सरकार नीति निर्देशक तत्वों को गंभीरता से ले।- संविधान में वर्णित नीति निर्देशकों को किसका पूरक माना गया है?
- क्या नीति-निर्देशक तत्वों के उल्लघंन पर आप न्यायलय जा सकते है?
- राज्यों को नीति-निर्देशक तत्वों को लागू करवाने में कौन-सी शक्ति काम करती है?
- नीति निर्देशक तत्वों एवं मौलिक अधिकारों में अन्तर स्पष्ट करो?
उत्तर- i. नीति निर्देशक तत्वों को मौलिक अधिकार का पूरक माना गया है।
ii. नीति निर्देशक तत्वों के उल्लंघन पर न्यायालय नहीं जा सकते हैं
iii. नैतिक शक्ति अथवा जनमत की शक्ति।
iv. (1) मौलिक अधिकार न्याय संगत है। नीति निर्देशक तत्व न्याय संगत नहीं है।
(2) मौलिक अधिकार कुछ कार्यों को करने पर प्रतिबंध लगाते हें जबकि निर्देशक तत्व कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।
(3) मौलिक अधिकार व्यक्ति से तो निर्देशक तत्व समाज (राज्य) से संबंधित हैं। (कोई दो)।
छ: अंकीय के प्रश्नोत्तर-
- भारतीय संविधान में निहित मौलिक अधिकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर- मौलिक अधिकार-- समता,
- स्वतंत्रता,
- शोषण के विरूद्ध अधिकार
- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
- शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार
- संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
- समानता के अधिकार को निम्न बिन्दुओं के अन्तर्गत समझाइए-
उत्तर- i. कानून की नजर में गरीब एवं अमीर एक समान हैं। कानून की धाराएं सभी पर एक समान लागू होती है।
ii. रंग, जाति, नस्ल, क्षेत्र के आधार पर भेदभाव की मनाही।
iii. रोजगार (नौकरियों) में अवसर-समान योग्यता, समान परीक्षा में बैठने के मौके (अवसर)- कानून के समक्ष समानता।
- भेदभाव को निषेध (मनाही)
- रोजगार (नौकरियों) में अवसर की समानता।
- धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को लोकतंत्र का प्रतीक या आधार माना जाता हे। उपर्युक्त कथन को तर्क सहित सिद्ध कीजिए।
उत्तर- एक लोकतांत्रिक देश में प्रत्येक नागरिक महत्वपूर्ण होता है। उसको मत, धर्म, विचार मानने की आजादी होती है। लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति महत्वपूर्ण है। इसलिए इस अधिकार को लोकतंत्र का प्रतीक कहते है।- किसी भी धर्म को मानने एवं प्रचार करने की आजादी।
- सर्वजन हिताय-धार्मिक समुदाय बनाने की आजादी।
- धर्म विशेष के लिए कर (TAX) न देने की आजादी।
- सरकारी स्कूल कॉलेजों में धार्मिक शिक्षा पर पाबंदी।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने किस अधिकार को 'संविधान का हृदय और आत्मा' की संज्ञा दी है। इसके अन्तर्गत न्यायालय द्वारा जारी विशेष आदेशों (रिटों) को सविस्तार समझाइए।
उत्तर- संवैधानिक उपचारों के अधिकार को डी अम्बेडकर ने संविधान का हृदय और आत्मा कहा है। रिट- (i) बंदी प्रत्यक्षीकरण (ii) परमादेश (ii) प्रतिषेध (iv) अधिकार पृच्छा (v) उत्प्रेषण। - नीति निर्देशक तत्वों के उद्देश्यों एवं नीतियों को सविस्तार समझाइए
उत्तर-- लोगों का कल्याण, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय।
- जीवन स्तर ऊँचा उठाना, संसाधनों का समान वितरण।
- अन्तर्राष्ट्रीय शांति को बढ़ावा।
नीतियां- समान नागरिक संहिता, मद्दपान निषेध, घरेलू उद्योगों को बढ़ावा, उपयोगी पशुओ को मारने पर रोक। ग्राम पंचायतों को प्रोत्साह
- मौलिक अधिकारों एवं राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-- मौलिक अधिकार न्याय योग है। नीति निर्देशक तत्व नहीं।
- मौलिक अधिकार निषेधात्मक जबकि नीति निर्देश तत्व सकारात्मक है।
- मौलिक अधिकार व्यक्ति से जबकि नीति निर्देशक तत्व समाज से संबंधित है।
- मौलिक अधिकार का क्षेत्र सीमित है। नीति निर्देशक तत्वों का क्षेत्र विस्तृत है।
- मौलिक अधिकार राजनीतिक लोकतंत्र है। निर्देशक तत्व आर्थिक लोकतंत्र है आदि।
- मौलिक अधिकार प्राप्त हो चुके है। निर्देशक तत्वों को लागू करवाना है।