भारत के सन्दर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास-पुनरावृति नोट्स

                                       CBSE Class 12 भूगोल भाग – 2

पाठ – 9 भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास
पुनरावृति नोटस


भारत में नियोजन

 

 

 

 

 

 

 

प्रादेशिक नियोजन
लक्ष्य क्षेत्र
 -

  1. कमान नियंत्रित क्षेत्र
  2. सूखाग्रस्त विकास क्षेत्र
  3. पर्वतीय विकास क्षेत्र
  4. रेगिस्तानी विकास क्षेत्र

लक्ष्य समूह-

  1. लघु कृषक विकास संस्था (SFDA)
  2. सीमांत किसान विकास संस्था (म्फ्दा)

विकास: एक बहु आयामी संकल्पना

  • आर्थिक क्षेत्र
  • जन स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • समान अवसर
  • राजनितिक अधिकार
  • नागरिक अधिकार
  • सततपोषणीय

पाठ एक नजर में

महत्वपूर्ण बिंदु

  • नियोजन का तात्पर्य सोच विचार की प्रक्रिया, कार्य क्रम की रूप रेखा तैयार करना तथा उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए गतिविधियों के क्रियान्वयन से है |
  • भारत में नियोजन का कार्य “योजना आयोग” को सोंपा गया है जो केन्द्र सरकार के अधीन कार्य करता है । यह “योजना आयोग” एक वैधानिक संस्था है जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते है ।
  • हमारे देश में नियोजन पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से किया जाता है । अभी तक 10 पंचवर्षीय योजनाएं क्रियान्वयन की है तथा अब 11 वीं पंचवर्षीय योजना क्रियान्वित की जा रही है ।
  • सामान्यत: नियोजन के दो उपागम होते है । (1) खंडीय (2) प्रादेशिक
  • क्षेत्रीय एवं सामाजिक विषमताओं की प्रबलता को काबू में रखने के क्रम में योजना आयोग ने “लक्ष्य क्षेत्र” तथा “लक्ष्य समूह” योजना उपागमों को प्रस्तुत किया ।
  • योजनाओं के मुख्य उद्देश्य-राष्ट्रीय आय में वृद्धि, जीवन स्तर में वृद्धि, आर्थिक असमानताओं का कम करना, आत्म निर्भरता उपागमों न्याय स्थापित करना है |
  • देश में आर्थिक विकास में असमानता है | जिसे कम करने के लिये विभिन्न योजनायें बनायी गई है | हिमाचल प्रदेश के भरमौर क्षेत्र के लिए समन्वित जन जातीय विकास कार्यक्रम इसी प्रकार का कार्यक्रम है |
  • पहाड़ी क्षेत्रों में विकास की योजनाएँ इन क्षेत्रों की स्थलाकृति, पारिस्थितिकी, सामाजिक व आर्थिक दशाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है |
  • सुखा प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना और सूखे के प्रभावों को कम करना योजनाओं का मुख्य उद्देश्य होता है |
  • जन जातीय समन्वित विकास उपयोजना लागू होने से भरमौर जन जातीय क्षेत्र में विकास की नई पहल शुरू हुई है जिसका सामजिक प्रभाव साक्षरता में वृद्धि एवं बाल विवाह में कमी के रूप में देखा जा सकता है |
  • पर्यावरणीय मुद्दों पर विश्व समुदाय की चिंता को ध्यान में रखकर संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व पर्यावरण और विकास आयोग की स्थापना की | जिसकी प्रमुख नर्वे की प्रधानमंत्री गरो  हरलेम ब्रैंटलैड थी |
  • विकास की अवधारणा में सबका बहुआयामी विकास जिसमें आर्थिक क्षेत्र के साथ-साथ जन स्वास्थ्य शिक्षा एवं समान अवसर हो, शामिल किया गया |