सुमित्रानंदन पंत - पर्वत प्रदेश में पावस - महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 2

CBSE कक्षा 10 हिंदी 'ब' स्पर्श (काव्य खंड)
पाठ - 3 पर्वत प्रदेश मे पावस
महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

कविता के विषय, अर्थबोध एवं सराहना पर आधारित पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
  1. 'मेखलाकार' शब्द का क्या अर्थ है? कवि ने इस शब्द का प्रयोग यहाँ क्यों किया है?
    उत्तर-
     'मेखलाकार' का अर्थ है - मेखला या करधनी के आकार की। यहाँ पर्वत शृंखला को ही मेखलाकार कहा गया है। पर्वत की ढाल भी मेखलाकार होती है। यहाँ प्रकृति का मानवीकरण किया गया है।
  2. कवि ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है और क्यों?
    उत्तर- कवि ने तालाव की समानता दर्पण के साथ दिखाई है। इसका कारण यह है कि दोनों पारदर्शी होते हैं। दोनों में व्यक्ति अपना प्रतिबिंब देख सकता है।
  3. शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में क्यों धँस गए?
    उत्तर- शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में इसलिए धँस गए क्योंकि अंबर ने अचानक धरती पर वर्षा के बाणों से आक्रमण कर दिया था। वर्षा के ऐसे भयंकर रूप को देखकर ही शाल के वृक्ष भयभीत होकर धँस गए प्रतीत होते थे।
  4. पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर देख रहे थे और वे किस बात को प्रतिबिंबत करते हैं?
    उत्तर-
     ऊँचे-ऊँचे वृक्ष पर्वत के हृदय से उठकर आकाश की ओर देखकर सोच रहे थे कि वे कब आकाश को छू लेंगे। वे किस उपाय से इतना ऊँचा उठ सकेंगे। वे मन में उच्च आकांक्षा धारण किए हुए थे। वे मानव की महत्त्वाकांक्षा को प्रतिबिंबत करते हैं।
  5. निम्नलिखित पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए
    'है टूट पड़ा भू पर अंबर।'

    उत्तर-
     इसका आशय है - वर्षा ऋतू में बदलों के छा जाने से ऐसा लगता है मानों अचानक बादल रूपी बड़े-बड़े पंखों को फड़फड़ा कर पर्वत कहीं उड़ गया हो। बादलों के कारण पर्वत दिखाई नहीं देता है। केवल झरनों के बहने की आवाज सुनाई देती है। ऐसी मुसलाधार वर्षा हो रही है मानों आकाश धरती पर टूट कर गिर गया हो।
  6. कवि सुमित्रानंदन पंत की भाषा-शैली एवं साहित्यिक विशेषताओं का वर्णन करें।
    उत्तर- पंत प्रकृति, प्रेम और कल्पना के कोमल छायावादी कवि थे। उनका काव्य रोमांटिक तथा व्यक्ति-प्रधान है। प्रकृति का जैसा सुंदर, कोमल और सूक्ष्म वर्णन उन्होंने किया है, वैसा अन्य किसी ने नहीं। प्रकृति के बाद उन्होंने अपने काव्य में नारी-सौंदर्य को स्थान दिया। तत्पश्चात वे प्रगतिवाद की ओर मुड़ गए। उन्होंने शोषकों के प्रति क्रोध और दलितों के प्रति सहानुभूति के भाव व्यक्त किए। अंत में वे अध्यात्म की ओर मुड़ गए। उनका मानवतापाद सारी मानवता को एक करना चाहता है। पंत जी शब्दों के कुशल शिल्पी माने जाते हैं। वे शब्दों की आत्मा तक गहरी पहुँच रखते हैं। उनकी भाषा में संस्कृति के शब्दों की अधिकता है। वे कोमल, मधुर और सूक्ष्म भावों को प्रकट करने वाले शब्दों का प्रयोग करते हैं। पंत जी ने उपमा, रूपक, अनुप्रास और मानवीकरण अलंकारों का अतीव सुंदर प्रयोग किया है। वे हिंदी वे एक गौरवशाली कवि हैं।
  7. 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता की विषय-वस्तु अपने शब्दों में व्यक्त करें।
    उत्तर-
     इस कविता में पावस (वर्षा) ऋतू में पर्वतीय क्षेत्र के क्षण-क्षण परवर्तित होते सौंदर्य की मनोरम झाँकी प्रस्तुत की गई है। मेखलाकार पर्वत अपने ऊपर खिले फूलों के दृगों के माध्यम से चरणों में स्थित तालाब के जल में अपनी शोभा को निहारता दिखाई देता है। तालाब का जल दर्पण कि भाँति है। पर्वत-प्रदेश के झरने झर-झर कर नाद करते रहते हैं। ये झरने पर्वतों का यशोगान करते प्रतीत होते हैं। झरनों के स्वर में नई मस्ती, जोश तथा उत्साह है। इन झरनों की बूँदें मोतियों के हार के समान लगते हैं। ऊँचे पर्वत पर उगे वृक्ष पर्वत के हृदय में पल रही महत्त्वाकांक्षाओं के समान हैं। ये वृक्ष नीले आकाश को एकटक निहारते रहते हैं। इन्हें देखकर लगता है कि ये किसी चिंता में डूबे हुए हैं। तभी अचानक विशालकाय पर्वत धुंध में गायब हो जाता है। ऐसा लगता है कि पर्वत बादलों के पंख लगाकर उड़ गया है। कभी ऐसा प्रतीत होता है कि नीला आकाश टूटकर पृथ्वी पर गिर पड़ा है। वातावरण में चारों ओर गहरी धुंध छा जाती है। इसमें पर्वत, तालाब सब गायब हो जाते हैं। ऐसा लगता है कि तालाब में आग लग गई और उसी का धुआँ उठ रहा है। ये सब दृश्य जादुई प्रतीत होते हैं। लगता है जैसे इंद्र ये सब जादू दिखा रहा है। यहाँ कवि प्रकृति के अद्भुत बिंब प्रस्तुत करता है।